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डीआईओएस को सुपुर्द होंगे कर्मचारी-शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड्स

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लखनऊ। हुसैनगंज की जर्जर और खंडहर बिल्डिंग में चल रहे चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज के सभी कर्मचारियों और शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड जिला विद्यालय निरीक्षक लखनऊ देवेंद्र कुमार पांडे को सुपुर्द किए जाएंगे। विजय कुमार पांडे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडे को आदेश दिया है कि वे शिक्षिकाओं और कर्मचारियों के सभी सर्विस रिकॉर्ड अपने कब्जे में तत्काल ले लें। सूत्र बताते हैं कि खंडहर बिल्डिंग में चल रहे छात्राओं के स्कूल को पूर्व डीआईओएस राकेश कुमार पांड़े की मिलीभगत से जानबूझकर सिर्फ इसलिए चलाया जा रहा था, जिससे कि पवन कुमार वर्मा की मैनेजरी बची रहे। इसके पहले आईजीआरएस पोर्टल पर स्कूल की बिल्डिंग के जर्जर और खंडहर होने की शिकायत प्रिंसिपल डॉ सुमन शुक्ला की ओर से की जा चुकी थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से राकेश कुमार पांड़े लेटर-लेटर खेल रहा था। जनहित का जब यह मामला विजय कुमार पांडे ने हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में अधिवक्ता गिरीश तिवारी के माध्यम से उठाया तब न्यायमूर्ति के आदेश पर न केवल बच्चे स्थानांतरित किए गए बल्कि शिक्षिकाओं को भी समायोजित करने के आदेश पारित हुआ। राकेश कुमार की मिलीभगत का आलम यह था कि वह शिक्षिकाओं और कर्मचारियों को बिना समायोजित किए ही भाग गया। देवीपाटन मंडल के डीडीआर पद पर ट्रांसफर किए गए राकेश कुमार पाड़े को माध्यमिक शिक्षामंत्री के यहां तैनात एक अधिकारी की मिली भगत से जॉइंट डायरेक्टर का भी चार्ज मिल गया है, जिसकी जांच की मांग कई स्कूल मैनेजर और अधिवक्ताओं ने उत्तर प्रदेश शासन से की है। न्यायालय ने इस मामले में स्टैंडिंग काउंसिल को कंप्लायंस एफिडेविट 30 जुलाई को दाखिल करने को आदेशित किया है।



कॉलेज की जमीन और प्रशासनिक योजना भी फर्जी 
लखनऊ। चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रशासनिक योजना को ठेंगा दिखाते हुए मैनेजर पवन वर्मा ने अपने बेटे रोहन वर्मा को जहां डिप्टी मैनेजर बना रखा है तो वही पत्नी रेखा वर्मा को उपाध्यक्ष बना लिया है। इसके अलावा भी अपने दो रिश्तेदारों को कमेटी में रख रखा है। और इस पूरी प्रशासनिक योजना को पूर्व डीआईओएस राकेश कुमार पांड़े और तत्कालीन ज्वाइन्ट डायरेक्टर सुरेंद्र तिवारी और मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर डॉक्टर प्रदीप सिंह की मिलीभगत से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यही नहीं राकेश कुमार पाड़े ने कार्यकारिणी के चुनाव को भी अपना पर्यवेक्षक भेज कर गलत ढंग से आख्या मंगाकर कमेटी को अप्रूव करते हुए मैनेजर पवन वर्मा के हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिए। इस मामले में भी समाजसेवी सुमेर अग्रवाल ने कई शिकायतें शासन को की थीं लेकिन मिलीभगत के चलते पूर्व डीआईओएस राकेश कुमार ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं मिलीभगत के चलते कॉलेज की जमीन के कोई भी कागज देखे बिना ही राकेश कुमार ने उसको फर्जी दस्तावेज के दम पर अलंकार योजना में पैसा दिलाने की कोशिश कर रहा था।

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